Monday, July 16, 2012

कोई दर्द मुझमें अब.. चिल्लाता क्यूँ नही..?

कोई दर्द मुझमें अब..
चिल्लाता क्यूँ नही..?
अश्क आँखों में गर है..
तो पलकों पे आता क्यूँ नही..?
पराए बनके हसाते तो सभी हैं ..
कोई बनके अपना.. रुलाता क्यूँ नहीं.. ?
चलने का जुनूँ.. अब भी है मुझे..
राह-ए-मंज़िल कोई.. हमें बुलाता क्यूँ नही.. ?
शब-ए-उम्र गुज़री है.. इसी इंतजार में ..
कोई ख्वाब मेरी पलकों तक आता क्यूँ नहीं ...?

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