Saturday, August 18, 2012

क्या क्या खबरें लिख रही हैं? अबकी बारिश में.. ये अख़बार

कहाँ मुमकिन था.. कि पहुचे तेरा हाल |
मुझ तक/
और मेरा/
तुझ तक/
इसलिए काटे बैठें हैं.. दुनिया के सारे तार |

फिर भी जाने क्या क्या
खबरें दे रही हैं
हवाएँ, बारिश की इस बार |

जल रहे हैं शहर /अपनों के लगाए आगों से..
फैल रहा जहर../सत्ता के सपोलों के पाले नागों से ...

पड़ रहें हैं.. खून के छींटे कहीं..
और नफ़रत की आवाज़ें
छीन रही हैं.. कई घर बार..|

क्या क्या  खबरें लिख रही हैं?
अबकी बारिश में.. ये अख़बार |

2 comments: