Monday, August 20, 2012

देवदास

बाल क्या बढ़ गये ..  लोगों ने देवदास ही कह दिया :)
तो चंद पंक्तियाँ शरत जी के इस महानायक पर ही सही ..जिसकी कहानी.. दिलीप कुमार, संजय लीला भंसाली और अनुराग कश्यप ने अपने अपने काल अनुरूप सुनाई है..
...

जो पारो हमसे रूठी तो..
हम देवों के दास हुए..
पैमानों मे जब ढूँढा उसको
मयखाने सूखे.. उदास हुए.. |
चंद्रमुखी के अंजुमन में ..
सब भूल के महवेयास हुए ...
मुग्ध प्रीत की अकुलता पर
मन मंदिर में उसके उजास हुए ..|
जब मिलने चला पारो से ..
विद्रोही मुझसे मेरे अंतिम सांस हुए... |
है कहने को तो यह बस..
एक कथा... प्रेम व्यथा की ...
पर हर दौर में पारो रूठे हैं
और जग मे जाने कितने देवदास हुए ... |

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