Friday, February 24, 2012

मुख़्तसर सी तेरी,, बस एक नज़र चाहिए ...



































मुझको आरजू नहीं.. तेरे साथ के सफ़र का ..

मुख़्तसर सी तेरी,, बस एक नज़र चाहिए ... |

तेरी यादें जगाती हैं मुझे रात भर ..
हों ख्वाबों से.. रूबरू मेरी पलकें.. 
नींद का इन्हें बस एक पहर चाहिए ...||

है आलम-ए-बेताबी क्या.. कोई पूछे मेरे दिल से
होश नही... अपनी धड़कनो का..
और तेरे पल पल की इसे खबर चाहिए ..||

कबका छूटा हुआ..  मेरा शहर मुझसे ..
भुला आशियाँ.. मेरा घर मुझसे ..
बहुत दूर से उड़ चला हूँ
बागे-ए-गुलशन मे तेरे एक शजर चाहिए ..

सबसे पूछती तेरा पता.. मेरी ग़ज़लें.. मेरी गीतें ..
तेरी गलियों से होके  गुज़रे .. इन्हे हर वो डगर चाहिए

तू मिले ना मिले मुझको ..
तेरी यादो का सहारा उम्रभर चाहिए

मुझको आरजू नहीं.. तेरे साथ के सफ़र का ..
मुख़्तसर सी तेरी,, बस एक नज़र चाहिए ...

Monday, February 6, 2012

जाने आज क्यूँ ...


जाने आज क्यूँ दिल बैठ रहा ..
जाने आज क्यूँ आँखे नम है ....

खुशियों की अर्थी पे..
अरमानो की लाशें हैं ..
जिंदगी क्यूँ हो चली..
सपनों की मातम है ...

खो गया वो कहा, खुशनुमा सा ...
जो दिख रह था मंज़र...
पहले ही जख्म क्या कम गहरे थे ..
की हालात लेके आया है नये खंजर ...

मुझी में दब के रह गयी मेरी चीखें ..
कोई मेरे रब से पूछे ...
किस बात के ये सितम हैं ...
क्यूँ मुझपे फिदा हैं बर्बादीयाँ..
क्यूँ इतने अज़ीज मुझसे ...
मेरे दर्द-ओ-गम है ...