Thursday, March 29, 2012

नही बदला मेरा गाव है


 वही नीम के पेड़ हैं ..
वही पीपल की छाव हैं..
वही प्रेम स्नेह है ..
वही हेलमेल
अटूट एकता का भाव है ..
कितने दृश्य बदले.. मंज़र बदले.
नही बदला मेरा गाव हैं..


वो दादी नानी नही रहे..
 परियों की कहानी नही रहे..
सब बड़े हो गये ..
अपने पैरों मे खड़े हो गये ..
वो साथ पुरानी नही रहे ...
व्क़्त की बदल ने बाहर बदला..
अंदर मे सबके वही पुराना लगाव है..
कितने दृश्य बदले मंज़र बदले ..
नही बदला.. मेरा गाव है.

वही कोला-बड़ी पोखर ..है
तुलसी-चौरा आँगन मे .
. लता फूलों की चादर है..
पथर के घरों के बीच..
उन्मुक्त खड़ा पुराना माटी का घर है..
रायगढ़ परिवर्तन की लहर मे समाई है..
धानी माटी के असीमित गर्भ से आकर्षित
आदयोगिक आँधी आई है.
हर तरफ विकास नवनिर्माण का ज़ोर है ..
धूल धूसरित सड़कें हैं ..ट्रकों का शोर है ..
इन सबसे दूर किसी कोने मे नीरवता शांति
का पड़ाव है..
कितने दृश्य बदले मंज़र बदले ..
नही बदला मेरा गाव है

Friday, March 9, 2012

मत बाँध मुझे तू शब्दों में ..


मत बाँध मुझे तू शब्दों में ..
आज अबाधित बह जाने दे..
इन उठते तूफ़ानों को
मत अंदर ही अंदर रह जाने दे...

मैं उन भावों की कविता ...
जो ना सुनी कभी.. ना पढ़ीं गयी ..
मैं उन सपनों की गाथा ..
जो ना बुनी कभी.. ना गढ़ी गयी ..

जो अधरों ने ना कह पाया
अब नज़रों से ही कह जाने दे..
मत बाँध मुझे तू शब्दों में ..
आज अबाधित बह जाने दे..