Monday, August 20, 2012

रात के सवाल ...

रात के सवाल
बहुत गहरे हैं ..
नींद इन आँखों में..
कहाँ ठहरे हैं...
कुछ ख्वाब...
नई सुबह की इंतजार लिए
इन जागती आँखों में
कबसे रह रहे हैं...

देवदास

बाल क्या बढ़ गये ..  लोगों ने देवदास ही कह दिया :)
तो चंद पंक्तियाँ शरत जी के इस महानायक पर ही सही ..जिसकी कहानी.. दिलीप कुमार, संजय लीला भंसाली और अनुराग कश्यप ने अपने अपने काल अनुरूप सुनाई है..
...

जो पारो हमसे रूठी तो..
हम देवों के दास हुए..
पैमानों मे जब ढूँढा उसको
मयखाने सूखे.. उदास हुए.. |
चंद्रमुखी के अंजुमन में ..
सब भूल के महवेयास हुए ...
मुग्ध प्रीत की अकुलता पर
मन मंदिर में उसके उजास हुए ..|
जब मिलने चला पारो से ..
विद्रोही मुझसे मेरे अंतिम सांस हुए... |
है कहने को तो यह बस..
एक कथा... प्रेम व्यथा की ...
पर हर दौर में पारो रूठे हैं
और जग मे जाने कितने देवदास हुए ... |

Saturday, August 18, 2012

क्या क्या खबरें लिख रही हैं? अबकी बारिश में.. ये अख़बार

कहाँ मुमकिन था.. कि पहुचे तेरा हाल |
मुझ तक/
और मेरा/
तुझ तक/
इसलिए काटे बैठें हैं.. दुनिया के सारे तार |

फिर भी जाने क्या क्या
खबरें दे रही हैं
हवाएँ, बारिश की इस बार |

जल रहे हैं शहर /अपनों के लगाए आगों से..
फैल रहा जहर../सत्ता के सपोलों के पाले नागों से ...

पड़ रहें हैं.. खून के छींटे कहीं..
और नफ़रत की आवाज़ें
छीन रही हैं.. कई घर बार..|

क्या क्या  खबरें लिख रही हैं?
अबकी बारिश में.. ये अख़बार |