Thursday, November 22, 2012

कुछ पंक्तियाँ...

१)कहा संजोए...
दिलों में जो अरमान हैं ..
आशियाना भी यहाँ तो
अब किराए के मकान हैं..

२)कल तक जिनके दावों में
मैं अपना था ...
आज सब पराए निकले ..
अंधेरों ने जरा क्या घेरा
गुमशुदा मेरे साये निकले..

३) लोगों को परखने में
इस बार तो बड़ी भूल हो गई ..
उनका भी वक्त जाया हुआ..
कुछ भावनाएँ अपनी भी फज़ूल हो गई ...

४) कहा होता है ये अक्सर
की आँखों मे
इतनी नमी हो ..
और वक्त की
फिर भी कमी हो..