Monday, January 7, 2013

सब के मुह को ये क्या हो गया है ?

सब के मुह को ये क्या हो गया है ?
इन संकीर्ण स्वघोषित बुद्धजिवियों में
अभद्रता, क्या इतने गहरे बीज बो गया है.....??
जो भी बोल रहा है ,,..
अपनी गिरी सोच का परदा खोल रहा है??
ये धर्मगुरू,बाबा,गड़-प्रमुख
खुद ही खुद में भगवान बने हैं ..
किसने इन चोरों को चुनकर भेजा ?
जो प्रजातंत्र के अपमान बने हैं ??
चिर-हरण, लक्ष्मण-रेखा..
ये बनते बड़े सायने हैं ..
खुद की जिहवा क्या लाँघ रही है ..
ये क्यूँ फिर ना जाने हैं ...?
मूर्ख बयान-बाजी अब कॉम्पीटिशन हो गया है ..
बेचारा दिग्गी इस भीड़ में कही खो गया हैं ..
सब के मुह को ये क्या हो गया है ?